महंगे सोने-चांदी की चमक में बुझते चूल्हे, सराफा बाजार में छाई बेचैनी रिकॉर्ड कीमतों ने कारीगरों की रोजी पर डाला संकट, हर शहर में उठ रहे सवाल

25 Jan, 2026 74 व्यूज
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सिवनी नायक दर्पण

सोने और चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने जहां निवेशकों का ध्यान खींचा है, वहीं जेवर तराशने वाले कारीगरों और आम उपभोक्ताओं के लिए यह चमक मुसीबत बन गई है। सराफा बाजार में मांग ठंडी पड़ने से हजारों कारीगरों के चूल्हे बुझने की कगार पर हैं। शादी-ब्याह के सीजन के बावजूद खरीदारी घटने से बाजार में बेचैनी साफ दिख रही है।
कारीगरों का कहना है कि लंबे समय से काम नहीं मिल रहा। पहले जहां रोजाना ऑर्डर मिलते थे, अब हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है। कई कारीगर मजबूरी में पेशा बदलने या कर्ज लेने को मजबूर हैं। बड़े शहरों के साथ-साथ कस्बों में भी हालात एक जैसे हैं—वर्कशॉप खाली, मशीनें बंद और हाथ बेरोजगार।
सराफा कारोबारियों के मुताबिक ऊंची कीमतों ने ग्राहकों को हल्के वजन और सस्ते विकल्पों की ओर मोड़ दिया है। लोग सोने की जगह चांदी, आर्टिफिशियल या रीसेल ज्वेलरी को तरजीह दे रहे हैं। इससे पारंपरिक कारीगरी पर सीधा असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में स्थिरता और सरकार की ओर से कारीगरों के लिए राहत पैकेज जरूरी है। सवाल हर शहर में एक ही है—क्या सोने-चांदी की यह महंगाई कारीगरों की आजीविका निगल जाएगी, या समय रहते समाधान निकलेगा?